YUVA एक विचार, एक स्वप्न, एक आंदोलन या एक समृद्ध राष्ट्र का सपना ||

राष्ट्रधर्म सर्वोपरि ||

देश प्रेम बढ़ाएंगे, भ्रष्टाचार मिटायेंगे ||

हमारा नारा भ्रष्टाचार भारत छोड़ो ||

YUVA का घोषणा पत्र

YUVA एक विचार, एक स्वप्न, एक आंदोलन या एक समृद्ध राष्ट्र का सपना है । जिसका आदर्श है राष्ट्रधर्म सर्वोपरि। अन्याय अत्याचार और सिस्टम की खामियों को तलाशने और उसे दुरुस्त करने की कोशिश का नाम है YUVA. कैसे खत्म होगा भ्रष्टाचार ? कुरीति ? बेईमानी ? दूषित राजनीति ? यकीनन आम भारतीयों के पास इन सवालों का उत्तर नहीं है। जिसके पास उत्तर देने की जिम्मेदारी है उसमें उत्तर देने का साहस नहीं है। जो साहस करते हैं वे कभी हरियाणा के सीनियर आईएएस अशोक खेमका की तरह सिस्टम का शिकार बनते हैं तो कभी यूपी की आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल की तरह उसे भ्रष्ट सत्ता के आगे नाक रगड़नी पड़ती है। मित्रों इस अत्याचार, भ्रष्टाचार और अनाचार का जवाब है सभी धर्मों से परे राष्ट्रधर्म। जब सरकार, शासन और नागरिक राष्ट्रधर्म का पालन करेंगे तो देश खुशहाली की ओर बढ़ेगा।

जैसे कोई भी ड्राइवर एक्सीडेंट नहीं चाहता, कोई भी पिता बच्चों का भविष्य खराब नहीं करना चाहता वैसे ही बीते दौर में निश्चित रूप से हमारे जनप्रतिनिधियों, हमारे पूर्वजों ने अपनी समझ और जरूरत के मुताबिक अच्छा ही किया होगा। संभव है अच्छा या बहुत अच्छा करने के प्रयास में ही खुद के विकास की परिपाटी बना दी। जिसने हम सबको स्वार्थी, धनलोलुप और सत्ता लोलुप बना दिया। परिणाम स्वरूप चंद घराने और चंद लोगों तक ही देश का संसाधन सिमटने लगा। अपनों के लिए संचय करने की प्रवृत्ति ने हमें इस हद तक लुटेरा और स्वार्थी बना दिया कि हम लूट को, कामचोरी और गलत रास्तों को ही जस्टिफाई करने लगे। क्या राजनेता, क्या अधिकारी, कैसा शिक्षा का मंदिर, कौन सा अस्पताल, क्या अधिकारी, क्या कर्मचारी, धर्म के नाम पर, जल और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बात खनिज संपदा की हो या स्पेक्ट्रम, हर ओर देश को लूटा जाने लगा। देश के संसाधनों की लूट खसोट का अंजाम यह हुआ कि जिसे जो मिल रहा है उसे अपने घर में भर लेने पर आमादा है. घर भर जा रहा है तो बैंक या विदेशों में पैसा लगाया जा रहा है या यही लूट का पैसा एफडीआई या पीपीपी मॉडल के नाम पर काले से सफेद हो जा रहा है। इसका बड़ा हिस्सा सत्ता को भी जाता है अतः सब खामोश रहते हैं। क्या नेता क्या अधिकारी. सरकारी सेक्टर की देखा देखी लूट की आग प्राइवेट संस्थानों तक पहुंच गई जैसे गांव की आग जंगल में जा पहुंचे. क्या शिक्षा. क्या चिकित्सा. काहे की पुलिस कौन सी कचहरी, मुंसिफ भी मुजरिम के कठघरे में आ जाते हैं यहां. लूट और बंदरबांट का ऐसा नंगा नाच शुरू हुआ जिसने हम सब को मानवता के प्रति असंवेदनशील कर दिया । एक दूसरे से आगे निकलने की ऐसी होड़ मची कि हर कोई भारत माँ को ही नोचने पर आमादा नजर आ रहा है।

' मेरी दुल्हन तो आज़ादी है ' वाले भगत सिंह के आज़ाद भारत में ऐसा दिन भी आएगा जिसमें पूरे के पूरे तंत्र पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे , जनसेवक जेल जाएंगे , ऐसा शायद ही किसी आज़ादी के दीवाने ने सोचा होगा । गिरावट का ऐसा दौर चला कि सारे सामाजिक , राजनीतिक धार्मिक और आर्थिक मूल्य धराशाई हो गए । पर जैसा कि हम सब जानते हैं अंधकार जितना घना हो , सूरज उतना ही प्रासंगिक और अवश्यम्भावी हो जाता है ।

सैद्धांतिक रूप से सभी मानते हैं कि इस पर रोक लगायी जानी चहिए, मगर करने के नाम पर अधिकांश किनारा कर जाते हैं। YUVA का एक मात्र धर्म है राष्ट्रधर्म, अर्थात हम उस राह पर चलेंगे जो देश के हित में हो, मानवता के पक्ष में हो।

1. सदस्यता की शर्तें

संस्था में प्रवेश की सर्वप्रथम शर्त होगी कि देश प्रेम को वह अपनी प्रथम तीन वरीयता में रखे।

क. देश प्रेम- देश को जिन बातों से नुकसान पहुंचता हो वह करने का आरोपी न हो। किसी भी प्रकार से देश विरोधी, सेना विरोधी, सांप्रदायिक विवाद भड़काने वाले बयान देने का आरोपी न हो।

ख. किसी भी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में किसी भी सक्षम अदालत से सजा न पाया हो।

ग. सोशल मीडिया के स्टेटस और विचार भी अगर समाज या देश के विरोध में पाए जाते हैं तो उसे संस्था का सदस्य नहीं बनाया जा सकता।

घ. जाति धर्म या लिंग के आधार पर कोई विभाजन या भेदभाव नहीं होगा।

ड़. वरियता उसे जो पहले किसी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा रहा हो।

च. भारत का नागरिक हो और उम्र 18 वर्ष से कम न हो।

छ. ऐसे किसी संगठन का सदस्य न हो जिनके विचार मूलतः अलग हो।

ज. सक्षम अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले में दंडित न किए गए हो।

2. सदस्यता की प्रक्रिया

क. पहले सादे पेपर पर आवेदन लिया जाएगा। एक सप्ताह बाद फार्म देकर (फोटो और एड्रेस) आईडी लेकर सदस्यता दी जाएगी।

ख. सारी प्रक्रिया संगठन सचिव की देखरेख में पूरी की जाएगी। सबसे पहले किसी भी आवेदन कर्ता को तीन माह की सदस्यता दी जाएगी। इस दौरान वह संगठन के मतदान में भाग नहीं लेगा।

ग. सबसे पहले सिर्फ एक वर्ष की सदस्यता दी जाएगी। एक वर्ष के बाद तीन साल की सदस्यता दी जा सकेगी। इसके लिए वार्षिक एक हजार और मासिक सौ रुपये सदस्यता शुल्क लिया जाएगा। संगठन सचिव विशेष परिस्थितियों में इसे घटा या समाप्त भी कर सकते हैं।

सदस्यता की समाप्ति

1. देश समाज विरोधी गतिविधि, मृत्यु, त्यागपत्र, या निष्कासन

2. आमंत्रित किए जाने के बाद भी आयोजन एवं मीटिंग आदि में लगातार अनुपस्थिति.

3. संस्था विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता. जिससे संस्था को क्षति पहुंच रही हो।

4. अनर्गल बयानबाजी करना।

5. समस्त जांच आदि का कार्य अनुशासन समिति और संगठन सचिव की निगरानी में किया जाएगा।

YUVA समान विचार वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर सकती है बशर्ते इसकी पहले से अनुमति ले ली गई हो।

YUVA का संगठन

क. युवा ब्लाक, जिला, जोन और प्रांत स्तर पर काम करेगी।

ख. हर कमेटी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, महासचिव, सचिव, संगठन सचिव और प्रचार सचिव होंगे।

ग. संस्था हर जिले में प्रोफेशनल्स, वरिष्ठ नागरिकों आदि में से वे लोग जो सीधी वर्किंग में न आकर पीछे से विचार योजनाएं या आर्थिक सहयोग देंगे संस्था उन्हें अपना संरक्षक नियुक्त कर सकती है। ऐसे लोगों की संख्या दस से अधिक नहीं रखी जाएगी। संरक्षकों के पास सदस्यों के समान ही बैठकों में आने और वोट करने का अधिकार होगा।

घ. इसके अतिरिक्त जिला और प्रांत स्तर पर एक एक प्रवक्ता भी बनाए जाएंगे जिनपर समस्त सूचनाएं जरूरी व्यक्तियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी।

ङ. हर स्तर पर महिला और छात्र इकाई का गठन भी किया जाएगा।

च. प्रांत स्तर पर एक प्रधान संयोजक होंगे जो सभी सलाहकारों, संरक्षकों के संपर्क में रहेंगे। और संस्था के लिए एक्शन प्लान बनाएंगे। प्रधान संयोजक के साथ दो संय़ोजक होंगे जो प्लानिंग का अंग होंगे और उन पर सलाह देने की जिम्मेदारी होगी। जिलों में भी एक संयोजक होंगे जो प्रांतीय संयोजकों के संपर्क में रहेंगे।

छ. संयोजक योजनाएं तैयार करके अध्यक्ष को सौंप देंगे जिसे कार्यकारिणी कार्यरूप में बदलेगी इस कार्य में संयोजक (वर्किंग) गाइड कर सकेंगे ।

ज. Yuva के प्रथम वर्ष में जी-जान लगाकर काम करने वालों को संरक्षण देने वालों को संस्था में सदैव सम्मान दिया जाएगा। उन्हें संस्थापक सदस्य का परिचय पत्र भी जारी किया जाएगा। किसी भी संस्थापक सदस्य. को तबतक निष्कासित नहीं किया जा सकेगा जबतक ऐसा किया जाना अपरिहार्य न हो जाय। इसके लिए भी दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा। यदि कोई संस्थापक सदस्य लिखित त्यागपत्र अध्यक्ष को सौंप देता है तो वह अपनी संस्थापक सदस्यता खो देगा।

झ. संस्था के सदस्यों के लिए परिचय पत्र जारी किया जाएगा। उसकी लागत सदस्यता शुल्क के साथ ली जाएगी।

राज्य कार्यकारिणी के अधिकार और कर्तव्य

क. अधिकाधिक समूहों का गठन।

ख. संयोजक की सलाह पर विचार योग्य मुद्दों पर कार्य किया जाना सुनिश्चित करना।

ग. प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य बहुमत के साथ अध्यक्ष, संयोजक महासचिव और कोषाध्यक्ष को वापस बुला सकेंगे।

घ. तीन वर्ष पर राज्य और दो वर्ष पर जिला तथा ब्लाक कार्यकारिणी का चुनाव कराया जाना आवश्यक होगा।

ङ. एक पदाधिकारी एक पद पर लगातार तीन बार ही चुना जा सकता है। सर्व सम्मति बनती है तो संख्या बढ़ सकती है.

च. प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्यों का बहुमत संविधान में संशोधन कर सकेगा।

छ. राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर नीति निर्धारण का काम कर सकेगी।

ज. एक व्यक्ति एक समय में एक ही पद पर काम करेगा।

झ. जिला स्तर पर प्रतिमाह और प्रांत स्तर पर दो माह में एक बैठक करनी आवश्यक होगी।

(क) YUVA के आदर्श व्यक्तित्व

व्यक्तिगत रूप से बहुत सारे लोगों ने राष्ट्रधर्म का पालन किया और आज भी कर रहे हैं। जिसकी फेहरिस्त बहुत लंबी होगी फिर भी कुछ नाम गिनाता हूं ताकि YUVA को समझना आसान हो। लाल बहादुर शास्त्री, टीएन शेषन, एपीजे अब्दुल कलाम, अटल बिहारी वाजपेयी, जीआर खैरनार, अशोक खेमका (उस तकलीफ का अंदाजा लगाना कठिन है जब 52 की उम्र में 51वें तबादले पर उन्होंने जब कहा कुछ निहित स्वार्थ फिर जीत गए), लोकनायक जय प्रकाश, राममनोहर लोहिया, इंदिरा गांधी आदि। ऐसा नहीं है कि हमारे आसपास ऐसे लोग नहीं हैं। बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी, शिक्षक, डॉक्टर, वकील, पत्रकार, व्यापारी और नेता ईमानदारी से अपना काम करते हैं।

(ख) इमानदारी से काम करने वालों का सम्मान होगा

धीरे-धीरे सिस्टम ऐसा बनता जा रहा है कि ईमानदार व्यक्ति के लिए काम करना और अपने परिवार की परवरिश करना कठिन होता जा रहा है। कम आय है तो बच्चों को अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा सकते। कोई गंभीर बीमारी हो जाय तो बच्चों या माता-पिता को सरकारी अस्पताल में तिलतिल कर मरते देखते रहो। हद तब हो जाती है जब मामूली बीमारी भी धनाभाव या किसी लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है। पहुंच न हो तो साक्ष्य सामने होने पर भी हत्या आत्महत्या में बदल दी जाती है। मंदिर-मस्जिद, अगड़े-पिछड़े और जाति-धर्म की आग लगाकर या अनर्गल बयानबाजी करके जनता का मूल समस्या से ध्यान हटाने को ही सियासत मान लिया गया है। कोई राष्ट्रगान और वंदेमातरम् को अनिवार्य करने के पक्ष में बोल रहा है तो कई ने खिलाफत से ही अपनी सियासत चमका ली। छात्रों को उसके मन के कालेज और विषय नहीं मिल रहे, युवा चाहे बेरोजगारी से तंग आकर जान दे या किसान फसल के वाजिब मूल्य को तरसें, जाम से शहरी जूझते रहें या टैक्स की मार से व्यापारी हलकान हों। सिस्टम अपनी गति से ही चलता रहता है। लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा फेल नजर आ रही है। हमारे हीरो जिन्होंने राष्ट्र के लिए कुर्बानी दी उनके स्थान पर सर्वाधिक सुख और संसाधनों का लाभ लेने वाले हमारे काल्पनिक हीरो ही समाज में सम्मान पाने लगे हैं। YUVA का प्रयास होगा कि इमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान करके उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाय और उनका सामाजिक सम्मान कराया जाय। ताकि समाज के लिए ऐसे लोग आइकान बनें।

(ग) जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण

YUVA शिक्षा के माध्यम से बच्चों में देशप्रेम का बीजारोपण कर सभी नागरिकों को जिम्मेदार नागरिक ( जो सही गलत समझें और उचित कार्य करें ) बनाएगी । क्योंकि नागरिकों को यह बताना कि कूड़ा कहां फेंके, टायलेट करने के बाद फ्लश करें और खाने से पहले हाथ धुलें यह हमारी शिक्षा प्रणाली की असफलता है। नागरिकों का जिम्मेदार होना इस नाते भी जरूरी है कि जनसहयोग के अभाव में बड़े-बड़े सरकारी अभियान भी सफल नहीं हो पाते।

1. राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रति युवाओं में विशेष अनुराग भरा जाएगा ताकि देश राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करे। विद्यालयों के साथ ही सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों के प्रारंभ में राष्ट्रगान अनिवार्य किया जाएगा।

2. विद्यालयों में देश के रीयल हीरोज (शहीदों) के कारनामों को पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में स्थान दिया जाय।

3. हमें अगर देश को सुरक्षित करना है तो छात्रों को और नागरिकों को देश की चुनौतियों से रू-ब-रू कराना होगा। उन्हें प्रेरित करना होगा कि समस्याओँ का समाधान तलाशें और जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी दें।

4. YUVA छात्रों और राजनीति में जाने के इच्छुक लोगों को योग्य व्यक्तियों से प्रशिक्षित कराने का प्रयास करेगी ताकि वे हर प्रकार से समर्थ हों।

5. YUVA ग्रामीण तथा शहरी जीवन की समस्याओँ को समझने के लिए टीम बनाकर शोध करेगी और समस्याओं का समाधान तलाशकर उनका जड़ से खात्मा किया जाएगा।

6. छात्रों में नशे की लत बढ़ रही है उन्हें इससे दूर रहने और देश प्रेम का नशा करने को प्रेरित करेंगे।

7. तमाम अभिभावक अपने बच्चों को सेना में भेजने से बचते हैं। सभी बच्चों के लिए जीवन में कम से कम एक वर्ष सेना के साथ अनिवार्य रूप से रहना होगा। एनसीसी या इस तरह का कोर्स सभी छात्रों को कम से कम साल भर जरूर कराया जाय।

8. Yuva छात्रों को लगभग निःशुल्क और समान शिक्षा सुविधा देने की पक्षधर है ताकि देश के मेधावी छात्रों का कभी अहित न हो। इसके लिए सहमति तैयार करना।

सदस्यता का आधार और जिम्मेदारियां

Yuva की प्राथमिक सदस्यता किसी भी भारतीय को दी जा सकती है। सदस्यता के लिए देश से प्रेम होना एक अनिवार्य शर्त है। किसी भी सदस्य द्वारा भारत राष्ट्र के खिलाफ बोलने, राष्ट्र के प्रतीक चिन्हों का अपमान करने, किसी महिला का जानबूझकर अपमान करने को संस्था की नीतियों के खिलाफ माना जाएगा और नोटिस देकर प्राथमिक सदस्यता जांच के बाद समाप्त मानी जाएगी। जांच होने तक आरोपी सदस्य निलंबित रखा जाएगा। इस दौरान वह किसी भी मीटिंग या गतिविधि में भाग नहीं ले पाएगा। समस्त कार्रवाई संस्था की अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर की जाएगी।

अनुशासन समिति – तीन सदस्यीय अनुशासन समिति का गठन संगठन की निगरानी करने के लिए गठित किया जाएगा। इसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे। यह समिति संस्था के भीतर आपसी सामन्जस्य बनाने एवं आरोपी सदस्यों की जांच का काम करेगी।

अध्यक्ष - संस्था की कार्ययोजना तैयार करना एवं समस्त गतिविधियों का संचालन कराना।

उपाध्यक्ष – अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उसके तमाम दायित्वों का निर्वहन करना।

महासचिव – संस्था की तमाम गतिविधियों का डाटा रखना, मीटिंग बुलाना और संगठन को मजबूत बनाना।

कोषाध्यक्ष – संस्था के समस्त कोष आदि का रिकार्ड रखना और अध्यक्ष के साथ खाते का संचालन करना।

सचिव – सचिव का कार्य महासचिव की अनुपस्थिति में उसके समस्त दायित्वों का पालन करना एवं हर कार्य में महासचिव का सहयोग करना।

संगठन सचिव – संगठन के प्रसार और विस्तार के कार्य में महासचिव के साथ मिलकर काम करना।

प्रचार सचिव – संस्था के प्रचार प्रसार के कार्यों को संपादित कराना।

धरोहर को भविष्य के लिए संजोएं

हम , भारत के लोग , इस बात पर गर्व करते हैं कि हम 'वसुधैव कुटम्बुकम ' की विचारधारा का पालन करने वाले लोग रहे हैं। विविधता में एकता और सामाजिक समरसता जैसे सिद्धान्तों में हमारा यकीन सदियों पुराना है । प्राकृतिक संसाधनों से लेकर वैज्ञानिक अन्वेषणों तक हमारे गांव और हमारा समाज एक परिपक्व और सम्पूर्ण इकाई की बेहतरीन मिसाल रहा है ।

पर कहते हैं न कि विरासत जितनी सम्पन्न होती है , उसे संभाल कर रखना एवम और समृद्ध बनाना उतना ही कठिन होता है । भारत में भी कमोबेश यही हाल है. आज़ादी के लिए हमने बहुत बड़े स्तर पर बहुत लंबी लड़ाई लड़ी और अनगिनत शहादतों के बाद आज़ादी हासिल की । मगर आजाद भारत की सरकारों ने देश और आवाम की मजबूती के लिए काम नहीं किया. वोट के लिए कभी छूट दी तो कभी कभी मुफ्त का प्रलोभन देकर गरीब जनता को खरीदा जाता है। नहीं बात बनती तो बरगलाया या, लड़ाया जाता है। हम और आप मिलकर सिस्टम बनते हैं, हम और आप ही मिलकर सरकार बनते या बनाते हैं। हम ही घूस लेते हैं तो हम ही घूस देते हैं। बहुत सारे लोग अत्याचार और भ्रष्टाचार से अकेले या छोटे-छोटे समूहों में लड़ रहे हैं। अंधकार को पराजित करने की कोशिश में हैं। हम उम्मीद करते हैं कि Yuva उन बेचैन लोगों का संबल बनेगी जो अपनी पूरी शक्ति से अंधकार को हराने के प्रयास में जी जान से लगे हैं ।

आइये , अधिकारों के लिये लड़ने से पहले अपने कर्तव्यों को समझें । समझें कि अगर हम बदलाव का हिस्सा नहीं बने तो आने वाली पीढ़ी हमें ही बदल देगी । अगर आज हमने आज़ादी के मायनों को नहीं पहचाना तो एक और आज़ादी की लड़ाई होगी , और इस बार वो लड़ाई अगली पीढ़ी हमसे लड़ेगी। यह एक ऐसी लड़ाई होगी जिसे जीतने पर भी हमारी ही हार होगी । लड़ाई समाजिक सरोकारों से लेकर संसाधनों तक के अधिकार की है। बचे हुए को अपने भविष्य के लिए संयोजित करने की लड़ाई है। राष्ट्रधर्म और देशप्रेम का अर्थ अपने पुरखों की भूमि की रक्षा करना नहीं, अपनी संतानों के लिए मेधा और संसाधनों के संरक्षण है।