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देश को प्रगति पथ पर ले जाने का लिया संकल्प

देश को प्रगति पथ पर ले जाने का लिया संकल्प

गांधी और शास्त्री जयंती पर युवा की सभा

अलग-अलग राजघरानों, रियासतों और अंग्रेजों की दासता की बेड़ियों से भारत कभी आजाद नहीं होता अगर देश एक सूत्र में पिरोया न जाता। यह काम किया महात्मा गांधी और उनके अहिंसक आंदोलन ने। बम हर कोई नहीं फेंक सकता, गोलियां जिगर वाले ही चला पाते हैं मगर धरना प्रदर्शन और आंदोलन भीड़ करती है। बम और गोलियां हर विद्रोही का हथियार था मगर महात्मा गांधी ने उसे हथियार बनाया जो जन जन का हथियार बना और देश आजाद हो गया।
ठीक इसी प्रकार जब दुनियां दो ध्रुवों में विभाजित हो चुकी थी और दुनिया के दोनों नेता देश अमेरिका और रूस भारत को अपने पक्ष में मिला लेना चाहते थे। चीन से युद्ध के बाद टूटे भारत का निर्माण कर रहे लाल बहादुर शास्त्री दोनों ही वर्ल्ड लीडर्स को पसंद नहीं थे। ऐसे में अमेरिका के चढ़ाने पर पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। अमेरिका ने पाकिस्तान का सपोर्ट किया अपने युद्दक तक भेजे मगर शास्त्री जी का साहस था कि झुके नहीं और अमेरिका को झुका दिया। भारत को झुकाने के लिए दोनों दुनिया के चौधरियों ने आखिरकार शास्त्री जी को छल से रास्ते से हटाया वर्ना छोटे कद के शास्त्री जी के बाद ही दुनिया के किसी नेता का नाम लिया जाता। 
ऐसे नेताओं को yuva के सभी साथियों ने नमन किया और शपथ ली कि देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए हम सब मिलकर जो भी कर सकेंगे करेंगे। यहां विद्यालयों में काम जारी रखने पर सहमति बनी और जल्द रूप रेखा तैयार करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रगान के साथ सभा को समाप्त किया गया।
समारोह/सभा में डॉ. डीपीएस रावत, कवियत्री हेमा भट्ट, विशाल लाठे हिंदुस्तानी, शैलेश भारतीय, राजेश भारतीय, अनंत लोहिया, सौरभ सिंह, आलोक वर्मा, शौर्य प्रताप सिंह, विवेक जायसवाल शिवांक चौधरी राजेंद्र और सागर आदि मौजूद रहे।

 

 

 

 

 

अलग-अलग राजघरानों, रियासतों और अंग्रेजों की दासता की बेड़ियों से भारत कभी आजाद नहीं होता अगर देश एक सूत्र में पिरोया न जाता। यह काम किया महात्मा गांधी और उनके अहिंसक आंदोलन ने। बम हर कोई नहीं फेंक सकता, गोलियां जिगर वाले ही चला पाते हैं मगर धरना प्रदर्शन और आंदोलन भीड़ करती है। बम और गोलियां हर विद्रोही का हथियार था मगर महात्मा गांधी ने उसे हथियार बनाया जो जन जन का हथियार बन गया।

 

इस अहिंसा के हथियार ने लोगों को विरोध का साहस दिया। व्यक्तिगत रूप से मेरा मत है कि महात्मा गांधी ने भी 1922 के असहयोग आंदोलन की विफलता ने उन्हें भी हिंसा के रास्ते पर ला छोड़ा तभी उन्होंने करो या मरो का नारा दिया। 1922 में सिर्फ चौरीचौरा (गोरखपुर) में हिंसा हुई थी। तब महात्मा गांधी ने इसे अपनी विफलता मानते हुए आंदोलन वापस ले लिया। 1942 में समूचा देश हिंसा की आग में जला और आंदोलन वापस नहीं लिया गया और देश आजाद हो गया।मेरा स्पष्ट मत है कि अगर 1922 में गांधी जी ने असहयोग वापस न लिया होता तो देश 1925-26 तक आजाद हो जाता।  

अलग-अलग राजघरानों, रियासतों और अंग्रेजों की दासता की बेड़ियों से भारत कभी आजाद नहीं होता अगर देश एक सूत्र में पिरोया न जाता। यह काम किया महात्मा गांधी और उनके अहिंसक आंदोलन ने। बम हर कोई नहीं फेंक सकता, गोलियां जिगर वाले ही चला पाते हैं मगर धरना प्रदर्शन और आंदोलन भीड़ करती है। बम और गोलियां हर विद्रोही का हथियार था मगर महात्मा गांधी ने उसे हथियार बनाया जो जन जन का हथियार बना और देश आजाद हो गया।

ठीक इसी प्रकार जब दुनियां दो ध्रुवों में विभाजित हो चुकी थी और दुनिया के दोनों नेता देश अमेरिका और रूस भारत को अपने पक्ष में मिला लेना चाहते थे। चीन से युद्ध के बाद टूटे भारत का निर्माण कर रहे लाल बहादुर शास्त्री दोनों ही वर्ल्ड लीडर्स को पसंद नहीं थे। ऐसे में अमेरीका के चढ़ाने पर पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। अमेरिका ने पाकिस्तान का सपोर्ट किया अपने युद्दक तक भेजे मगर शास्त्री जी का साहस था कि झुके नहीं और अमेरिका को झुका दिया। भारत को झुकाने के लिए दोनों दुनिया के चौधरियों ने आखिरकार शास्त्री जी को छल से रास्ते से हटाया वर्ना छोटे कद के शास्त्री जी के बाद ही दुनिया के किसी नेता का नाम लिया जाता।

ऐसे नेताओं को yuva के सभी साथियों ने नमन किया और शपथ ली कि देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए हम सब मिलकर जो भी कर सकेंगे करेंगे। यहां विद्यालयों में काम जारी रखने पर सहमति बनी और जल्द रूप रेखा तैयार करने का निर्णय लिया गया।

समारोह/सभा में डॉ. डीपीएस रावत, कवियत्री हेमा भट्ट, विशाल लाठे हिंदुस्तानी, शैलेश भारतीय, राजेश भारतीय, अनंत लोहिया, सौरभ सिंह, आलोक वर्मा, शौर्य प्रताप सिंह, विवेक जायसवाल शिवांक चौधरी राजेंद्र और सागर आदि मौजूद रहे।