YUVA एक विचार, एक स्वप्न, एक आंदोलन या एक समृद्ध राष्ट्र का सपना ||

राष्ट्रधर्म सर्वोपरि ||

देश प्रेम बढ़ाएंगे, भ्रष्टाचार मिटायेंगे ||

हमारा नारा भ्रष्टाचार भारत छोड़ो ||

हमारे महानायक

विक्रमादित्य, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, बहादुशाह जफर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, आदि क्रांतिकारी राजनारायण बसु, वारींद्रनाथ घोष, प्रफुल्ल चाकी, कन्हई लाल दत्त, विनायक दामोदर सावरकर, श्याम जी कृष्ण वर्मा, मदन लाल धींगरा, भीखाजी रुस्तम कामा (पहली बार तिरंगा तैयार किया) शहीद मास्टर अमीर चंद,शहीद अवध बिहारी, विष्णु गणेश पिंगले, प्रताप सिंह बारहठ, रहमत अली शाह, सोहनलाल, रामरखा पाठक, यतींद्र नाथ मुखर्जी (बाघजीतन), चित्त प्रिय राय चौधरी, बटुकेश्वर दत्त, सुशीला मोहन दीदी, दुर्गा भाभी, डॉ. गया प्रसाद निगम, शिव वर्मा, मनोरंजन सेन गुप्ता, गेंदा लाल दीक्षित, मणींद्र बनर्जी, गणेश शंकर विद्यार्थी, मातंगिनी हाजरा, कनक लता बरुआ, चापेकर बंधु, महर्षि अरविंद, महादेव रानाडे, वासुदेव बलवंत फड़के, राजा राममोहन राय, कूका आंदोलन के राम सिंह कूका, वहाबी आंदोलन के शहीद शेरअली जैसे लाखों लोगों ने देश की आजादी के लिए जान की परवाह नहीं की और फांसी के फंदे पर झूल गए। बड़ी संख्या में अंग्रेज भारत के लोगों को गुलाम बना कर ले गए उनसे जानवरों की तरह काम कराया और जिसने मना किया उन्हें घोर यातना दी और जेलों में ठूंस दिया जहां अधिकांश को अघोषित रूप से मार दिया गया। हम सब न तो सभी की जयंती मना सकते हैं और न सभी को याद ही कर सकते हैं यहां तक कि सभी के नाम भी पता नहीं किए जा सकते हैं। यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि राजा, रानी, बादशाह और रियासतों को बचाने के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किए वह भी पूज्य हैं सम्मान के हकदार हैं पर हमने उन्हें यहां शामिल नहीं किया है।

कई सारे नामों को लेकर वर्तमान समय में विवाद भी चल रहा है क्योंकि अलग-अलग नायकों को राजनीतिक दलों ने अपना बताकर लाभ लेने का काम शुरू कर दिया है। यहां तक कि दुनिया ने जिसे महात्मा का खिताब दिया। देश ने कई दशकों तक जिसे निर्विवाद रूप से बापू कहा आज उन पर भी कीचड़ उछालने का काम गंदी राजनीति कर रही है, जिससे तमाम जनमानस भ्रम की स्थिति में है। महात्मा गांधी ने जिस प्रकार देश को एक डोर से बांधा वह निश्चित रूप से न पहले कोई कर सका न बाद में। सभी के कार्यों की समीक्षा होती रही है होती रहेगी।

इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम शहीदों को याद नहीं करेंगे, करेंगे मगर प्रतीक के रूप में सिर्फ उन लोगों को जो शहादत के प्रतीक हैं, जो निर्विवाद रूप से देश के लिए लड़े और जब तक जीवित रहे देश की बेहतरी के लिए काम करते रहे। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद तक के कुछ जन नायकों को yuva की टीम ने चुना है जिनके आदर्श देश की भावी पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणा और मार्ग दर्शन का काम करते रहेंगे।

gandhi मोहनदास करम चंद गांधी
swami dayanand saraswati स्वामी दयानंद सरस्वती
swami vivekananda विवेकानंद
mangal pandey मंगल पांडेय
lokmanya bal gangadhar tilak लोक मान्य बाल गंगाधर तिलक
lala lajpat rai लाला लाजपत राय
vipin chandrapal विपिन चंद्र पाल
sardar ballav bhai patel सरदार वल्लभ भाई पटेल
ras bihari bose रास बिहारी बोस
pandit ram prasad bismil पं. राम प्रसाद बिस्मिल
shaheed ashfaqulla khan शहीद अश्फाक उल्ला खां
shaheed roshan singh शहीद रोशन सिंह
shaheed rajendra singh lahiri शहीद राजेंद्र सिंह लाहिणी
subhash chandra bose सुभाष चंद्र बोस
chandra shekhar azad चंद्रशेखर आजाद
bhagat singh शहीदे आजाम भगत सिंह
kartar singh sarabha करतार सिंह सराभा
sufi amba prasad सूफी अंबा प्रसाद
shiv ram hari rajguru शिवराम हरि राजगुरु
shaheed sukhdev thapar शहीद सुखदेव थापर
shaheed udham singh शहीद ऊधम सिंह
bhagwan das mahore भगवान दास माहौर
munshi premchand (धनपत राय) मुंशी प्रेमचंद
bheem rao ambedkar भीमराव अंबेडकर
lal bahadur shastri लाल बहादुर शास्त्री
jai prakash narayan जय प्रकाश नारायण (लोकनायक)
ramdhari singh dinkar राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
ram manohar lohia राम मनोहर लोहिया
havildar abdul hamid हवलदार अब्दुल हमीद ( परमवीर चक्र)
apj abdul kalam एपीजे अब्दुल कलाम
t n seshan टीएन शेषन