YUVA एक विचार, एक स्वप्न, एक आंदोलन या एक समृद्ध राष्ट्र का सपना ||

राष्ट्रधर्म सर्वोपरि ||

देश प्रेम बढ़ाएंगे, भ्रष्टाचार मिटायेंगे ||

हमारा नारा भ्रष्टाचार भारत छोड़ो ||

हमारे संकल्प

"" किसी भी व्यक्ति की देश भक्ति सिर्फ उसके कर्म ही तय कर सकते हैं। वह अगर अपना कर्म इमानदारी से कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसे किसी से प्रमाण पत्र नहीं लेना।” राष्ट्र चिन्ह और राष्ट्रगान आदि का अपमान करना राष्ट्रद्रोह है और ऐसे लोगों से Yuva किसी भी हालत में संबंध नहीं रखेगी। ""

हमारी शिक्षा प्रणाली में कुछ कमी है या किताबों की बातें व्यवहारिक जीवन में प्रयोग नहीं की जातीं। यही वजह है कि देश में हर ओर भ्रष्टाचार फैलता जा रहा है। आम नागरिकों को धर्म और जाति की लड़ाई में उलझाकर राजनीतिक दल सत्ता हासिल करते हैं जिसके कारण बहुत बड़ा बजट व्यय करने के बाद भी तमाम बच्चे स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते, सबको इलाज, सुरक्षा रोजगार और न्याय अभी भी नहीं मिल पा रहा । कहते हैं देश में जनतंत्र है मगर गौर से देखें तो यह सिर्फ धनतंत्र है।

YUVA का घोषणा पत्र

YUVA एक विचार, एक स्वप्न, एक आंदोलन या एक समृद्ध राष्ट्र का सपना है । जिसका आदर्श है राष्ट्रधर्म सर्वोपरि। अन्याय अत्याचार और सिस्टम की खामियों को तलाशने और उसे दुरुस्त करने की कोशिश का नाम है YUVA. कैसे खत्म होगा भ्रष्टाचार ? कुरीति ? बेईमानी ? दूषित राजनीति ? यकीनन आम भारतीयों के पास इन सवालों का उत्तर नहीं है। जिसके पास उत्तर देने की जिम्मेदारी है उसमें उत्तर देने का साहस नहीं है। जो साहस करते हैं वे कभी हरियाणा के सीनियर आईएएस अशोक खेमका की तरह सिस्टम का शिकार बनते हैं तो कभी यूपी की आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल की तरह उसे भ्रष्ट सत्ता के आगे नाक रगड़नी पड़ती है। मित्रों इस अत्याचार, भ्रष्टाचार और अनाचार का जवाब है सभी धर्मों से परे राष्ट्रधर्म। जब सरकार, शासन और नागरिक राष्ट्रधर्म का पालन करेंगे तो देश खुशहाली की ओर बढ़ेगा।

जैसे कोई भी ड्राइवर एक्सीडेंट नहीं चाहता, कोई भी पिता बच्चों का भविष्य खराब नहीं करना चाहता वैसे ही बीते दौर में निश्चित रूप से हमारे जनप्रतिनिधियों, हमारे पूर्वजों ने अपनी समझ और जरूरत के मुताबिक अच्छा ही किया होगा। संभव है अच्छा या बहुत अच्छा करने के प्रयास में ही खुद के विकास की परिपाटी बना दी। जिसने हम सबको स्वार्थी, धनलोलुप और सत्ता लोलुप बना दिया। परिणाम स्वरूप चंद घराने और चंद लोगों तक ही देश का संसाधन सिमटने लगा। अपनों के लिए संचय करने की प्रवृत्ति ने हमें इस हद तक लुटेरा और स्वार्थी बना दिया कि हम लूट को, कामचोरी और गलत रास्तों को ही जस्टिफाई करने लगे। क्या राजनेता, क्या अधिकारी, कैसा शिक्षा का मंदिर, कौन सा अस्पताल, क्या अधिकारी, क्या कर्मचारी, धर्म के नाम पर, जल और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बात खनिज संपदा की हो या स्पेक्ट्रम, हर ओर देश को लूटा जाने लगा। देश के संसाधनों की लूट खसोट का अंजाम यह हुआ कि जिसे जो मिल रहा है उसे अपने घर में भर लेने पर आमादा है. घर भर जा रहा है तो बैंक या विदेशों में पैसा लगाया जा रहा है या यही लूट का पैसा एफडीआई या पीपीपी मॉडल के नाम पर काले से सफेद हो जा रहा है। इसका बड़ा हिस्सा सत्ता को भी जाता है अतः सब खामोश रहते हैं। क्या नेता क्या अधिकारी. सरकारी सेक्टर की देखा देखी लूट की आग प्राइवेट संस्थानों तक पहुंच गई जैसे गांव की आग जंगल में जा पहुंचे. क्या शिक्षा. क्या चिकित्सा. काहे की पुलिस कौन सी कचहरी, मुंसिफ भी मुजरिम के कठघरे में आ जाते हैं यहां. लूट और बंदरबांट का ऐसा नंगा नाच शुरू हुआ जिसने हम सब को मानवता के प्रति असंवेदनशील कर दिया । एक दूसरे से आगे निकलने की ऐसी होड़ मची कि हर कोई भारत माँ को ही नोचने पर आमादा नजर आ रहा है।

' मेरी दुल्हन तो आज़ादी है ' वाले भगत सिंह के आज़ाद भारत में ऐसा दिन भी आएगा जिसमें पूरे के पूरे तंत्र पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे , जनसेवक जेल जाएंगे , ऐसा शायद ही किसी आज़ादी के दीवाने ने सोचा होगा । गिरावट का ऐसा दौर चला कि सारे सामाजिक , राजनीतिक धार्मिक और आर्थिक मूल्य धराशाई हो गए । पर जैसा कि हम सब जानते हैं अंधकार जितना घना हो , सूरज उतना ही प्रासंगिक और अवश्यम्भावी हो जाता है ।

सैद्धांतिक रूप से सभी मानते हैं कि इस पर रोक लगायी जानी चहिए, मगर करने के नाम पर अधिकांश किनारा कर जाते हैं। YUVA का एक मात्र धर्म है राष्ट्रधर्म, अर्थात हम उस राह पर चलेंगे जो देश के हित में हो, मानवता के पक्ष में हो।

1. सदस्यता की शर्तें

संस्था में प्रवेश की सर्वप्रथम शर्त होगी कि देश प्रेम को वह अपनी प्रथम तीन वरीयता में रखे।

क. देश प्रेम- देश को जिन बातों से नुकसान पहुंचता हो वह करने का आरोपी न हो। किसी भी प्रकार से देश विरोधी, सेना विरोधी, सांप्रदायिक विवाद भड़काने वाले बयान देने का आरोपी न हो।

ख. किसी भी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में किसी भी सक्षम अदालत से सजा न पाया हो।

ग. सोशल मीडिया के स्टेटस और विचार भी अगर समाज या देश के विरोध में पाए जाते हैं तो उसे संस्था का सदस्य नहीं बनाया जा सकता।

घ. जाति धर्म या लिंग के आधार पर कोई विभाजन या भेदभाव नहीं होगा।

ड़. वरियता उसे जो पहले किसी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा रहा हो।

च. भारत का नागरिक हो और उम्र 18 वर्ष से कम न हो।

छ. ऐसे किसी संगठन का सदस्य न हो जिनके विचार मूलतः अलग हो।

ज. सक्षम अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले में दंडित न किए गए हो।

2. सदस्यता की प्रक्रिया

क. पहले सादे पेपर पर आवेदन लिया जाएगा। एक सप्ताह बाद फार्म देकर (फोटो और एड्रेस) आईडी लेकर सदस्यता दी जाएगी।

ख. सारी प्रक्रिया संगठन सचिव की देखरेख में पूरी की जाएगी। सबसे पहले किसी भी आवेदन कर्ता को तीन माह की सदस्यता दी जाएगी। इस दौरान वह संगठन के मतदान में भाग नहीं लेगा।

ग. सबसे पहले सिर्फ एक वर्ष की सदस्यता दी जाएगी। एक वर्ष के बाद तीन साल की सदस्यता दी जा सकेगी। इसके लिए वार्षिक एक हजार और मासिक सौ रुपये सदस्यता शुल्क लिया जाएगा। संगठन सचिव विशेष परिस्थितियों में इसे घटा या समाप्त भी कर सकते हैं।

सदस्यता की समाप्ति

1. देश समाज विरोधी गतिविधि, मृत्यु, त्यागपत्र, या निष्कासन

2. आमंत्रित किए जाने के बाद भी आयोजन एवं मीटिंग आदि में लगातार अनुपस्थिति.

3. संस्था विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता. जिससे संस्था को क्षति पहुंच रही हो।

4. अनर्गल बयानबाजी करना।

5. समस्त जांच आदि का कार्य अनुशासन समिति और संगठन सचिव की निगरानी में किया जाएगा।

YUVA समान विचार वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर सकती है बशर्ते इसकी पहले से अनुमति ले ली गई हो।